पहले टेस्ट की अंतिम एकादश में कुलदीप यादव का ना होना आश्चर्यजनक था। अक्षर पटेल की चोटिल होने के बाद लगा कि अब कुलदीप यादव चेन्नई टेस्ट का हिस्सा होंगे, लेकिन पटेल की जगह स्टैंड बाय आये शाहबाज नदीम को खेलने का मौका मिल गया। कुलदीप यादव को एक बार फिर बेंच में बैठना पड़ा। विराट कोहली का यह फैसला तब और गलत साबित हुआ जब पिच से गेंदबाजों को कोई भी मदद नहीं मिल रही थी। मैदान एकदम सपाट एक साफ-सुथरे सड़क जैसा था। इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने इस मौके को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी और दिन का खेल खत्म होने तक स्कोर बोर्ड में 265 रन टांग दिए थे। भारतीय गेंदबाज पूरे दिन में 90 कराने के बाद केवल तीन विकेट ही निकाल पाए। जब भारत में कोई विदेशी टीम खेलती है, तो विकेटों का सूखा नहीं पड़ता लेकिन यह बहुत समय बाद ऐसा हुआ है कि भारतीय गेंदबाज अपनी सरजमीं पर विकेट के लिए तरस गए हो। किसी भी विदेशी टीम के हम ऐसे आंकड़े भारत में बहुत कम देखते हैं कि कोई विदेशी टीम पूरे 90 ओवर खेली हो और ऑल आउट ना हुई हो। यह पहला मौका नहीं है जब विराट कोहली के आश्चर्यजनक फैसले टीम के लिए गलत साबित हुए हैं। टेस्ट क्रिकेट में एक अच्छी अंतिम एकादश चुनना बहुत महत्वपूर्ण होता है। लेकिन विराट कोहली ज्यादातर मौके पर एक अच्छी 11 चुनने में गलती कर जाते हैं। भारतीय सरजमीं पर टीम मैनेजमेंट की ये कमी उजागर नहीं हो पाती क्योंकि जीत हमेशा गलती में पर्दा डाल देता है, लेकिन बिते सालों के कुछ विदेशी दौरों को देखें तो टीम मैनेजमेंट की अंतिम एकादश की चूक की वजह से हम इंग्लैंड और साउथ अफ्रीका में श्रृंखला जीते जीते रह गए हमको वहां मायूसी हाथ लगी। 2017/18 के अफ्रीका दौरे पर पहले टेस्ट में अजिंक्य रहाणे को नहीं खिलाया गया उनकी जगह हार्दिक पांडे को खिला लिया गया बेशक हार्दिक पांड्या ने 90 रन की पारी खेली लेकिन उन 90 रनों की बदौलत हार्दिक पांड्या को तीनों टेस्ट खेलने का मौका मिल गया ।अजिंक्य रहाणे की और उनके अनुभव की कमी उस मैच में खली। क्योंकि हार्दिक पांड्या के आने से टीम का संतुलन बिगड़ गया ना तो एक प्रॉपर बैट्समैन था और ना ही एक प्रॉपर गेंदबाज। लेकिन टीम मैनेजमेंट का उन पर ज्यादा भरोसा दिखाना टीम के संतुलन को खराब कर दिया केपटाउन टेस्ट के बाद हार्दिक पांड्या का बाकी बचे दोनों टेस्ट मैचों में प्रदर्शन गेंद और बल्ले बाजी 2017 औसत रहा। इंग्लैंड दौरे पर कप्तान और टीम मैनेजमेंट ने एक संतुलित अंतिम एकादश नहीं उतारी। लॉर्डस टेस्ट में कुलदीप यादव का मौका दे दिया गया और संपूर्ण श्रंखला में भारत केवल पांच स्पेशलिस्ट बल्लेबाजों के साथ उतरा जो सोच और समझ से परे था लेकिन टीम मैनेजमेंट की सोच विराट कोहली से आगे जा ही पाती। टेस्ट क्रिकेट में हम विदेश में 5 प्रॉपर बैट्समैन नहीं खिला सकते थे क्योंकि भारत की बल्लेबाजी विदेश में कमी बन जाती है। ऐसे बहुत फैसले लिए गए जो इन दौरों पर भारत की हार का कारण बने। विराट कोहली हमेंशा कुछ ऐसे फैसले लेते हैं जो हमेशा टीम पर भारी पड़े हैं । एकदिवसीय क्रिकेट में देंखे तो चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल में टॉस जीतकर पाकिस्तान को पहले बल्लेबाजी का न्योता देना या वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में 4 विकेट गिरने के बाद एम एस धोनी को न भेजना और न जाने कितने गलत फैसले विराट कोहली ने अभी तक लिए हैं। उनको समझना होगा कि कप्तानी करते हुए 5-6 साल हो चुका है। पिच कंडीशन और गेम सिचुएशन पढ़ने में विराट कोहली अब धोखा नहीं खा सकते हैं और यह कुछ उदाहरण है जिन से जाहिर है कि विराट कोहली को अभी अपनी कप्तानी में और सुधार करना होगा उनके पास अभी भी 1 आईसीसी ट्रॉफी नहीं है।ये काबिले तारीफ है ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट श्रंखला जीतने वाले वाले वह पहले भारतीय कप्तान थे।
विराट कोहली और उनके फैसले।
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